यह गाँव है मेरा
रामरतन भाई - ''तुम कहाँ से आ रहे हो?''
राजरतन नें उत्सुकतापूर्वक अपनें भाई से प्रश्न किया। इस पर रामरतन ने जानकारी देते हुए उसे बताया कि आज हमारे गाँव का वह सपना पूरा होने जा रहा है, जो हमारे पिताजी का भी सपना था। वास्तव में ये दोनों भाई ऐसे गाँव के निवासी थे, जहाँ संचार, आवागमन, बिजली , सहकारी भंडार , राशन आदि की सुविधाओं का अभाव था।
आज उनके लिए खास दिन इसलिए था क्योकि गाँव के धनिक ने कुछ चुनिंद्दा महत्त्वपूर्ण लोगों को साथ लेकर अपने जिले के विकास अधिकारी से बात कर गाँव के विकास की पहल की थी। अधिकारी नें सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी उन्हें दी थी । योजना के अंतर्गत घर- घर बिजली पहुँचाना , पक्की सड़क और पेयजल की सुविधा प्रदान करने की बात कही गई थी ।
ग्रामवासियों में प्रसन्नता की लहर दौड़ रही थी , सभी उत्साहित थे , परंतु राजरतन इन सब बातों से अनभिज्ञ था।
वास्तव में वह बेहद परिश्रमी , मृदुभाषी, सरल और स्वाभिमानी व्यक्ति था, जो सदैव सबके हित की भावना रखता था। उस गाँव में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति था जो रामरतन के स्वभाव से परिचित न हो।
गाँव वालों के मन में उसके प्रति सम्मान और आदर का भाव था । इस सूचना को पा उसकी आँखों में भी चमक उत्पन्न हो गई । वह प्रायः खेत में काम करते हुए रेडियो की ध्वनि- तरंगों से सूचनाएँ पा लिया करता था गाँव में विकास के इन संसाधनों के महत्त्व से वह भली- भाँति परिचित था । आज भी तो वह रेडियो पर प्रसारित होने वाले कृषि कार्यक्रम की ही योजना पर काम किए जा रहा था। इससे सीख लेकर उसने उन्नत खेती भी सीख ली थी । बस आवश्यकता बिजली, पानी और सड़क की ही थी।
शीघ्र ही धनिक और लोगों के प्रयासों के फलस्वरूप सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुँचा और सड़क बिजली और पानी के स्रोतों से उनकी समस्याओं का न केवल निराकरण हुआ, बल्कि सर्वसम्मति से गाँव ने रामरतन को पंचायत सदस्य के रूप में स्थान दिलवा दिया। सर्वजन हिताय की भावना और सोच रखने वाला रामरतन वास्तव में अपने गाँव का सच्चा सेवक निकला और कुछ ही वर्षों मे सूचनाओं और अपने सद्व्यव्हार, मृदुल स्वभाव के कारण अधिकारियों से अच्छे संबंध स्थापित कर
परिश्रमी गाँव वालो के जीवन को सुखद बना दिया ।

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